होश आ रहा है उम्र बढ़ रही है सुब्ह होने को है रात चढ़ रही है ऐसे अर्श पर ला कर के रख दिया है मेरी दुनिया भी मुझ से ही लड़ रही है
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो
Shakeel Azmi
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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ऊपर वाला सब को देगा सबकी बारी आएगी ये सारी अफवाहें हैं इनको अफवाहें रहने दो
Yaduvanshi Abhishek
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वो मिरी रातों को तन्हा कर गई है कुछ नहीं बाक़ी मिरी जाँ मर गई है
Yaduvanshi Abhishek
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जो उस सेे हो गया था तब यक़ीनन अब नहीं होगा ख़ुद अपनी ही कहानी में यक़ीनन सब नहीं होगा भरोसा इश्क़ यारी सब रहा बेकार उस के बिन जो पागल था जवानी में यक़ीनन अब नहीं होगा
Yaduvanshi Abhishek
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मैं जब जब सो रहा हूँ किसी को खो रहा हूँ जवानी के दिनों में मैं पागल हो रहा हूँ
Yaduvanshi Abhishek
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इक बात ये कि मेरी क़िस्मत सही नहीं इक सच है ये कि उस ने चाहा नहीं मुझे
Yaduvanshi Abhishek
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