हम कुछ ऐसे उस के आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंज-ओ-नदामत, तन्हाई उस को ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझ सेा बन जाऊँ मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ हमारे बीच ज़माने की बद-गुमानी है मैं ज़िंदगी से ज़रा कम ही बात करता हूँ
Subhan Asad
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'असद' ये शर्त नहीं है कोई मुहब्बत में कि जिस सेे प्यार करो उस की आरज़ू भी करो
Subhan Asad
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पकड़ में आती नहीं है कभी वो शाख़-ए-विसाल हम एक बोसा-ए-गुल के लिए तरसते हैं
Subhan Asad
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मेरे शाइ'र! मैं वही हुस्ने-दिलावेज़, जिसे चाहने वाले बहुत, जानने वाले कम हैं
Subhan Asad
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कभी न लौट के आया वो शख़्स, कहता था ज़रा सा हिज्र है बस सरसरी बिछड़ना है
Subhan Asad
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