हम तो बचपन में भी अकेले थे सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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क्यूँँ मेरे साथ कोई और परेशान रहे मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे
Javed Akhtar
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ख़ून से सींची है मैं ने जो ज़मीं मर मर के वो ज़मीं एक सितम-गर ने कहा उस की है
Javed Akhtar
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कल जहाँ दीवार थी है आज इक दर देखिए क्या समाई थी भला दीवाने के सर देखिए
Javed Akhtar
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मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी
Javed Akhtar
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इन चराग़ों में तेल ही कम था क्यूँँ गिला फिर हमें हवा से रहे
Javed Akhtar
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