हमीं देते हैं पत्थर को कोई चेहरा हमीं हैं पूजते शाम-ओ-सहर उस को
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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साथ में मस्ज़िद का मेहमान चला जाएगा जैसे ही माहे रमज़ान चला आएगा
Irshad Siddique "Shibu"
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ज़रा मैं भी देखूँ वो दिल्ली चीज़ है क्या दोस्त जहाँ पे आ के मुझ को भूल गए
Irshad Siddique "Shibu"
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सुनो राम तुम बाण इक और चलाओ मिटा डालो जो मन में बैठा है रावण
Irshad Siddique "Shibu"
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ज़मीन है तुम सेे घर है बाबू जी वरना सब काग़ज़ भर है बाबू जी फख़्र से अपने सर को उठा के चलिए आप का लड़का शाइ'र है बाबू जी
Irshad Siddique "Shibu"
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वफ़ा नाम पे सब दग़ा कर रहे हैं मोहब्बत से हम इस लिए डर रहे हैं ख़ुशी से कहाँ कोई है जी रहा अब ख़ुशी से तो सब ख़ुद-कुशी कर रहे हैं जवां हम हों माँ बाप बूढ़े हो जाएँ जवानी से हम इस लिए डर रहे हैं कि नादानी में इश्क़ कर बैठे थे,सो जवानी में अब शा'इरी कर रहे हैं
Irshad Siddique "Shibu"
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