sherKuch Alfaaz

हमीं देते हैं पत्थर को कोई चेहरा हमीं हैं पूजते शाम-ओ-सहर उस को

More from Irshad Siddique "Shibu"

साथ में मस्ज़िद का मेहमान चला जाएगा जैसे ही माहे रमज़ान चला आएगा

Irshad Siddique "Shibu"

0 likes

ज़रा मैं भी देखूँ वो दिल्ली चीज़ है क्या दोस्त जहाँ पे आ के मुझ को भूल गए

Irshad Siddique "Shibu"

1 likes

सुनो राम तुम बाण इक और चलाओ मिटा डालो जो मन में बैठा है रावण

Irshad Siddique "Shibu"

1 likes

ज़मीन है तुम सेे घर है बाबू जी वरना सब काग़ज़ भर है बाबू जी फख़्र से अपने सर को उठा के चलिए आप का लड़का शाइ'र है बाबू जी

Irshad Siddique "Shibu"

0 likes

वफ़ा नाम पे सब दग़ा कर रहे हैं मोहब्बत से हम इस लिए डर रहे हैं ख़ुशी से कहाँ कोई है जी रहा अब ख़ुशी से तो सब ख़ुद-कुशी कर रहे हैं जवां हम हों माँ बाप बूढ़े हो जाएँ जवानी से हम इस लिए डर रहे हैं कि नादानी में इश्क़ कर बैठे थे,सो जवानी में अब शा'इरी कर रहे हैं

Irshad Siddique "Shibu"

2 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Irshad Siddique "Shibu".

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Irshad Siddique "Shibu"'s sher.