sherKuch Alfaaz

हमेशा याद आता है हमारा खेल बचपन का तेरा दूल्हा बना था मैं मेरी दुल्हन बनी थी तुम

More from Harshwardhan Aurangabadi

तेरी याद में हम ने ग़ज़लें कही थी तभी तो बड़ा ख़ूब ये साल गुज़रा

Harshwardhan Aurangabadi

2 likes

उस के हक में मुझे जो लगा कर दिया क़ैद से उस को हम ने रिहा कर दिया बात हिम्मत से दिल की कही थी मगर आपने जो सुना अन-सुना कर दिया

Harshwardhan Aurangabadi

2 likes

मेरे इस जन्म-दिन पर मौत भी हैरान है यारों न जाने कब तलक ज़िंदा रहेगा दर्द में वर्धन

Harshwardhan Aurangabadi

2 likes

इन आँखों में अश्कों का पहरा है शायद मेरा दुख समुंदर सा गहरा है शायद मेरी तेज़ धड़कन बताती है यारों रक़ीबों के घर से वो गुज़रा है शायद

Harshwardhan Aurangabadi

3 likes

रफ़्ता-रफ़्ता सब कुछ खोने को बैठा हूँ क्यूँँ चाहत में पागल होने को बैठा हूँ ना आया था साथी मेरा, ना आएगा सजदे में, राहों पर रोने को बैठा हूँ

Harshwardhan Aurangabadi

2 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Harshwardhan Aurangabadi.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Harshwardhan Aurangabadi's sher.