उस के हक में मुझे जो लगा कर दिया क़ैद से उस को हम ने रिहा कर दिया बात हिम्मत से दिल की कही थी मगर आपने जो सुना अन-सुना कर दिया
Related Sher
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
207 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
More from Harshwardhan Aurangabadi
तेरी याद में हम ने ग़ज़लें कही थी तभी तो बड़ा ख़ूब ये साल गुज़रा
Harshwardhan Aurangabadi
2 likes
तीरगी में रही बे-कसी रात भर दर्द देती रही, दिल-लगी रात भर मैं सवेरे तेरे शहर आता मगर ज़ख़्म आँखें दिखाती रही रात भर
Harshwardhan Aurangabadi
4 likes
इन आँखों में अश्कों का पहरा है शायद मेरा दुख समुंदर सा गहरा है शायद मेरी तेज़ धड़कन बताती है यारों रक़ीबों के घर से वो गुज़रा है शायद
Harshwardhan Aurangabadi
3 likes
मेरे इस जन्म-दिन पर मौत भी हैरान है यारों न जाने कब तलक ज़िंदा रहेगा दर्द में वर्धन
Harshwardhan Aurangabadi
2 likes
रफ़्ता-रफ़्ता सब कुछ खोने को बैठा हूँ क्यूँँ चाहत में पागल होने को बैठा हूँ ना आया था साथी मेरा, ना आएगा सजदे में, राहों पर रोने को बैठा हूँ
Harshwardhan Aurangabadi
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Harshwardhan Aurangabadi.
Similar Moods
More moods that pair well with Harshwardhan Aurangabadi's sher.







