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रफ़्ता-रफ़्ता सब कुछ खोने को बैठा हूँ क्यूँँ चाहत में पागल होने को बैठा हूँ ना आया था साथी मेरा, ना आएगा सजदे में, राहों पर रोने को बैठा हूँ

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तेरी याद में हम ने ग़ज़लें कही थी तभी तो बड़ा ख़ूब ये साल गुज़रा

Harshwardhan Aurangabadi

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अगर सब कहेंगे यूँंँ हिज़रत पे गज़लें कहाँँ फिर मिलेगी मोहब्बत पे गज़लें मोहब्बत मोहब्बत मैं गाता रहूँँगा अगर तुम सुनाओगे नफ़रत पे गज़लें

Harshwardhan Aurangabadi

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इन आँखों में अश्कों का पहरा है शायद मेरा दुख समुंदर सा गहरा है शायद मेरी तेज़ धड़कन बताती है यारों रक़ीबों के घर से वो गुज़रा है शायद

Harshwardhan Aurangabadi

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उस के हक में मुझे जो लगा कर दिया क़ैद से उस को हम ने रिहा कर दिया बात हिम्मत से दिल की कही थी मगर आपने जो सुना अन-सुना कर दिया

Harshwardhan Aurangabadi

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मेरे इस जन्म-दिन पर मौत भी हैरान है यारों न जाने कब तलक ज़िंदा रहेगा दर्द में वर्धन

Harshwardhan Aurangabadi

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