हुई है जिस को भी कहता है लानत है मुहब्बत नज़र की नींद से समझो बग़ावत है मुहब्बत अगर पूछे ज़माना इक बला जो ख़ूब-सूरत दबा कर गाल कह देना मुहब्बत है मुहब्बत
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
Munawwar Rana
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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किसी ने जब गए दिन का पता पूछा लगा ऐसा कि कोई हादिसा पूछा हमीं थे राह भटके लोग हैरत है हमीं से मंज़िलों ने रास्ता पूछा
Janib Vishal
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ये बहार-ए-सोग के ग़मनाक मंज़र मिल रहे हैं हम अगर ख़ुश मिल रहे तो ग़म छुपाकर मिल रहे हैं
Janib Vishal
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यार तुझ को ख़ुदा का हवाला न दे ज़हर दे रुख़्सती का पियाला न दे क़ब्र मंज़ूर है तेरे दिल में मगर इस तरह इश्क़ को दिल निकाला न दे
Janib Vishal
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ज़ब्त-ए-औक़ात भी औक़ात में आ जाता है बात उस की हो तो दिल बात में आ जाता है मौसम-ए-गुल भी बहाना है नहीं आने को आने वाला भरी बरसात में आ जाता है
Janib Vishal
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मैं नहीं मानता जा तिरी बंदगी तू ख़ुदा है अगर सामने आ के मिल
Janib Vishal
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