इक दनदनाती रेल सी 'उम्रें गुज़र गईं दो पटरियों के बीच वही फ़ासले रहे
sherKuch Alfaaz
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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दिया जला के सभी बाम-ओ-दर में रखते हैं और एक हम हैं इसे रह-गुज़र में रखते हैं समुंदरों को भी मालूम है हमारा मिज़ाज कि हम तो पहला क़दम ही भँवर में रखते हैं
Abrar Kashif
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उम्र गुज़री है माँजते ख़ुद को साफ़ हैं पर चमक नहीं पाए डाल ने फूल की तरह पाला ख़ार थे ना महक नहीं पाए
Vishal Bagh
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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