इक फूल पर कैसे कोई ठहरे होती ही है चंचल तितली रानी
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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तुम हमें जिन दिनों रुला गई हो हम नहीं कुछ अधिक ही हँस रहे हैं
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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कुछ यूँँ है तेरे जिस्म पर रंगीन तिल बेरी लगे हैं फूल जैसी झाड़ पर
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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कितने शरीर टूटे हैं एक बदन बनाने में
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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मिल-मिला के एक लड़की से वो गंगा घाट की सोएँगे फिर चैन से हम नर्मदा की गोद में
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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दिया ज़हर पहले उसी ने मुझे बचा भी लिया और फिर चूम कर
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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