मिल-मिला के एक लड़की से वो गंगा घाट की सोएँगे फिर चैन से हम नर्मदा की गोद में
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अव्वल तो मैं नाराज़ नहीं होता हूँ लेकिन हो जाऊँ तो फिर मुझ सेा बुरा होता नहीं है
Ali Zaryoun
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
Sandeep Thakur
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मैं अपने दोनों तरफ़ एक सा हूँ तेरे लिए किसी से शर्त लगा फिर मुझे उछाल के देख
Abrar Kashif
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हालत जो हमारी है तुम्हारी तो नहीं है ऐसा है तो फिर ये कोई यारी तो नहीं है
Ali Zaryoun
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तुम हमें जिन दिनों रुला गई हो हम नहीं कुछ अधिक ही हँस रहे हैं
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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ख़ुदा से है गिला इस बात की है दुश्मनी ज़मीं पे बिन इजाज़त के उतारा है मुझे
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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कुछ यूँँ है तेरे जिस्म पर रंगीन तिल बेरी लगे हैं फूल जैसी झाड़ पर
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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ले गया कोई उस का बदन और हम रूह का एक नारा लगाते रहे
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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कितने शरीर टूटे हैं एक बदन बनाने में
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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