ख़ुदा से है गिला इस बात की है दुश्मनी ज़मीं पे बिन इजाज़त के उतारा है मुझे
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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ले गया कोई उस का बदन और हम रूह का एक नारा लगाते रहे
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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तुम हमें जिन दिनों रुला गई हो हम नहीं कुछ अधिक ही हँस रहे हैं
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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मिल-मिला के एक लड़की से वो गंगा घाट की सोएँगे फिर चैन से हम नर्मदा की गोद में
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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हर दुआ पूरी करे उस की दुआ की जान हम ने ख़ुद की ही कुछ इस तरह ली
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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इक फूल पर कैसे कोई ठहरे होती ही है चंचल तितली रानी
Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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