इक हुस्न-ए-बेमिसाल की तम्सील के लिए परछाइयों पे रंग गिराता रहा हूँ मैं
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तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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एक दम उस के होंट चूम लिए ये मुझे बैठे बैठे क्या सूझी
Nasir Kazmi
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इसीलिए मैं बिछड़ने पर सोगवार नहीं, सुकून पहली ज़रूरत है, तेरा प्यार नहीं! जवाब ढ़ूंढ़ने में उम्र मत गँवा देना, सवाल करती है दुनिया पर एतबार नहीं
Balmohan Pandey
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सखियों संग रँगने की धमकी सुन कर क्या डर जाऊँगा तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
Kumar Vishwas
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'जौन' दुनिया की चाकरी कर के तू ने दिल की वो नौकरी क्या की
Jaun Elia
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रह-गुज़र-ए-ख़याल में दोश-ब-दोश थे जो लोग वक़्त की गर्द-बाद में जाने कहाँ बिखर गए
Jaun Elia
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मेरी हर बात बे-असर ही रही नक़्स है कुछ मिरे बयान में क्या
Jaun Elia
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ख़ूब है इश्क़ का ये पहलू भी मैं भी बर्बाद हो गया तू भी
Jaun Elia
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जो रा'नाई निगाहों के लिए सामान-ए-जल्वा है लिबास-ए-मुफ़्लिसी में कितनी बे-क़ीमत नज़र आती यहाँ तो जाज़बिय्यत भी है दौलत ही की पर्वर्दा ये लड़की फ़ाक़ा-कश होती तो बद-सूरत नज़र आती
Jaun Elia
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