इक महकते गुलाब की ख़ातिर सारी कलियाँ कुचल रहे हैं दोस्त
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सारी रात लगाकर उसपर नज़्म लिखी और उस ने बस अच्छा लिखकर भेजा है
Zahid Bashir
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सूखे फूल संभाले हँसती रहती है औरत सारी उम्र ही लड़की रहती है
Aabi Makhnavi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
Jaun Elia
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नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
Meer Taqi Meer
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तू वापस लौट कर आए न आए ये दरिया हर समय बहता मिलेगा
Shahzan Khan Shahzan'
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ठहर गया हूँ मुहब्बत के उस क़बीले में जहाँ से मुझ को बहुत जल्द लौट जाना था
Shahzan Khan Shahzan'
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रहना पड़ता है उदासी के नगर में हम को तब कहीं जाके ये अश'आर हुआ करते हैं
Shahzan Khan Shahzan'
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इश्क़ अधूरा मौत की नींद सुलाता है शुक्र मनाओ तुम को ज़िन्दा छोड़ दिया
Shahzan Khan Shahzan'
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उदासी चीख़ कर ये बोलती है तू आख़िर कब तलक मातम करेगा?
Shahzan Khan Shahzan'
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