इक रोज़ इक नदी के किनारे मिलेंगे हम इक दूसरे से अपना पता पूछते हुए
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए
Jaun Elia
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जो अपना हिस्सा भी औरों में बाँट देता है इक ऐसे शख़्स के हिस्से में आ गए थे हम
Ismail Raaz
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आँख हो बंद तो वो अपना है आँख खुल जाए तो वो सपना है वो मिले या नहीं मिले हम को उम्र भर उस का नाम जपना है
Sandeep Thakur
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अपने होंटों से कहो फूल को चू में हर रोज़ जब मेरे लब नहीं होंगे तो सहूलत होगी
Shahbaz Rizvi
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ज़रा सी आँख करनी है हमें बंद बहुत मुश्किल नहीं मरना हमारा
Shahbaz Rizvi
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ख़्वाब के आस पास रह रह कर थक गया हूँ उदास रह रह कर
Shahbaz Rizvi
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कितनी मुश्किल के बा'द टूटा है एक रिश्ता कभी जो था ही नहीं
Shahbaz Rizvi
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