इस क़दर दिल सहे ज़द ठीक नहीं इश्क़ की इतनी भी हद ठीक नहीं बंद कमरे से निकल आ बाहर दर्द की इतनी मदद ठीक नहीं
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मेरे हर ग़म में वो इज़ाफ़ा दानिस्ता करती है और ये काम भी वो आहिस्ता-आहिस्ता करती है
Nakul kumar
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लोग तो बस जिस्मों पर बनवाते फिरते हैं लेकिन तेरे नाम का टैटू मैं ने दिल पर बनवाया था
Nakul kumar
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इक लड़की जो मेरी दुनिया थी और वो भी दुनिया जैसी निकली
Nakul kumar
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शदीद उलझनें सब ख़्वाहिशें जला रही हैं अजीब हाल है मेरा समझ नहीं आता यूँँ ज़िंदा रहना भी क्या कोई बेवक़ूफ़ी है या कोई कमाल है मेरा समझ नहीं आता
Nakul kumar
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तू चाहिए कि मुकम्मल ही चाहिए मुझ को तिरा ये जिस्म भी मेरा हो और तेरा दिल भी
Nakul kumar
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