इक लड़की जो मेरी दुनिया थी और वो भी दुनिया जैसी निकली
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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सच बताओ कि सच यही है क्या साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या कुछ नया काम कर नई लड़की इश्क़ करना है बावली है क्या
Vikram Gaur Vairagi
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साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
Bashir Badr
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है
Waseem Barelvi
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शदीद उलझनें सब ख़्वाहिशें जला रही हैं अजीब हाल है मेरा समझ नहीं आता यूँँ ज़िंदा रहना भी क्या कोई बेवक़ूफ़ी है या कोई कमाल है मेरा समझ नहीं आता
Nakul kumar
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मुंतज़िर हूँ मैं सहर का रौशनी है तंग मेरी एक मिट्टी का दिया हूँ रात से हैं जंग मेरी
Nakul kumar
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बंजर हूँ तो बंजर ही रहने दो मुझे तुम अब मुझे कोई गुलिस्ताँ मत करो तंग आ चुके हैं हम तेरे इस इश्क़ से तुम छोड़ दो हम को परेशाँ मत करो
Nakul kumar
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इस क़दर दिल सहे ज़द ठीक नहीं इश्क़ की इतनी भी हद ठीक नहीं बंद कमरे से निकल आ बाहर दर्द की इतनी मदद ठीक नहीं
Nakul kumar
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लोग तो बस जिस्मों पर बनवाते फिरते हैं लेकिन तेरे नाम का टैटू मैं ने दिल पर बनवाया था
Nakul kumar
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