ishq ko naghma-e-ummid suna de aa kar dil ki soi hui qismat ko jaga de aa kar
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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कुछ इस तरह से याद आते रहे हो कि अब भूल जाने को जी चाहता है
Akhtar Shirani
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इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
Akhtar Shirani
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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या
Akhtar Shirani
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दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी 'अख़्तर' वो बे-ख़ुदी के ज़माने किधर गए
Akhtar Shirani
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कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता
Akhtar Shirani
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