इश्क़ पर जब शे'र लिखने बैठता हूँ आजकल मुस्कुराते लब मेरे हैं आँख रोती है मेरी
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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शा'इरी ये हुस्न और ये इश्क़ की बातें जनाब इक समय तक ठीक है फिर छोड़ देनी चाहिए
Ravi 'VEER'
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तितलियों की थी ज़रूरत सो उसे रक्खा मगर वो बग़ीचे के सभी फूलों को पत्थर कर गया
Ravi 'VEER'
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चाँद जो अगर देखूँ तुम ही याद आते हो चाँदनी तरसती है चाँद भूल जाता है
Ravi 'VEER'
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अक्सर इक पल में आँगन से जैसे चिड़िया उड़ जाती है ख़्वाब अधूरे रह जाते हैं मेरी निंदिया उड़ जाती है
Ravi 'VEER'
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चार दिन की ज़िंदगी जिस में यहाँ रह गए हैं दो ही दिन मेरे लिए
Ravi 'VEER'
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