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इस ज़माने को ज़माने की अदा आती है और इक हम है हमें सिर्फ़ वफ़ा आती है

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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे

Vikram Gaur Vairagi

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जब चाहें सो जाते थे हम, तुम सेे बातें कर के तब उल्टी गिनती गिनने से भी नींद नहीं आती है अब इश्क़ मुहब्बत पर ग़ालिब के शे'र सुनाए उस को जब पहले थोड़ा शरमाई वो फिर बोली इस का मतलब?

Tanoj Dadhich

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तुम ने एहसान किया था जो हमें चाहा था अब वो एहसान जता दो तो मज़ा आ जाए

Jaun Elia

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भले ही सैकड़ों मजबूरियाँ हों बेवफ़ाई की मगर तुम वज्ह मत बनना किसी सूनी कलाई की

Harsh saxena

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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं

Abrar Kashif

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