इज़हार पे भारी है ख़मोशी का तकल्लुम हर्फ़ों की ज़बाँ और है आँखों की ज़बाँ और
sherKuch Alfaaz
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मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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तू ने जिस बात को इज़हार-ए-मुहब्बत समझा बात करने को बस इक बात रखी थी हम ने
Ameer Imam
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कीजे इज़हार-ए-मोहब्बत चाहे जो अंजाम हो ज़िंदगी में ज़िंदगी जैसा कोई तो काम हो
Priyamvada ilhan
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दिल पे कुछ और गुज़रती है मगर क्या कीजे लफ़्ज़ कुछ और ही इज़हार किए जाते हैं
Jaleel 'Aali'
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वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़ेहन में न मैं कह सका न मैं लिख सका कि ज़बाँ मिली तो कटी हुई जो क़लम मिला तो बिका हुआ
Iqbal Ashhar
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