जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता इस शे’र में कई अर्थ ऐसे हैं जिनसे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वसीम बरेलवी शे’र में अर्थ के साथ कैफ़ियत पैदा करने की कला से परिचित हैं। ‘जहाँ’ के सन्दर्भ से ‘वहीं’ और इन दोनों के सन्दर्भ से ‘मकाँ’, ‘चराग़’ के सन्दर्भ से ‘रौशनी’ और इससे बढ़कर ‘किसी’ ये सब ऐसे लक्षण हैं जिनसे शे’र में अर्थोत्पत्ति का तत्व पैदा हुआ है। शे’र के शाब्दिक अर्थ तो ये हो सकते हैं कि चराग़ अपनी रौशनी से किसी एक मकाँ को रौशन नहीं करता है, बल्कि जहाँ जलता है वहाँ की फ़िज़ा को प्रज्वलित करता है। इस शे’र में एक शब्द 'मकाँ' केंद्र में है। मकाँ से यहाँ तात्पर्य मात्र कोई ख़ास घर नहीं बल्कि स्थान है। अब आइए शे’र के भावार्थ पर प्रकाश डालते हैं। दरअसल शे’र में ‘चराग़’, ‘रौशनी’ और ‘मकाँ’ की एक लाक्षणिक स्थिति है। चराग़ रूपक है नेक और भले आदमी का, उसके सन्दर्भ से रोशनी रूपक है नेकी और भलाई का। इस तरह शे’र का अर्थ ये बनता है कि नेक आदमी किसी ख़ास जगह नेकी और भलाई फैलाने के लिए पैदा नहीं होते बल्कि उनका कोई विशेष मकान नहीं होता और ये स्थान की अवधारणा से बहुत आगे के लोग होते हैं। बस शर्त ये है कि आदमी भला हो। अगर ऐसा है तो भलाई हर जगह फैल जाती है। शफ़क़ सुपुरी
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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मोहब्बत के घरों के कच्चे-पन को ये कहाँ समझें इन आँखों को तो बस आता है बरसातें बड़ी करना
Waseem Barelvi
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नज़र-अंदाज़ करने की सज़ा देनी थी तुझ को तेरे दिल में उतर जाना ज़रूरी हो गया था
Waseem Barelvi
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सब के चेहरे पे जो तनक़ीद किया करते हैं आइना उन को दिखा दो तो मज़ा आ जाए
Waseem Barelvi
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ध्यान रहे ये लोग तुम्हारी सफ़ में डर कर आए हैं तुम को ज़िंदा क्या रक्खेंगे जो ख़ुद मर कर आए हैं
Waseem Barelvi
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झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए और मैं था कि सच बोलता रह गया
Waseem Barelvi
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