जहान वालों से कह दो यहाँ से हट जाएँ ख़ुदा के और मेरे दरमियाँ से हट जाएँ
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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बिछड़ जाएँगे हम दोनों ज़मीं पर ये उस ने आसमाँ पर लिख दिया है
Siraj Faisal Khan
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दश्त जैसी उजाड़ हैं आँखें इन दरीचों से ख़्वाब क्या झांकें
Siraj Faisal Khan
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वो कभी आग़ाज़ कर सकते नहीं ख़ौफ़ लगता है जिन्हें अंजाम से
Siraj Faisal Khan
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उस के दिल की आग ठंडी पड़ गई मुझ को शोहरत मिल गई इल्ज़ाम से
Siraj Faisal Khan
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ख़याल कब से छुपा के ये मन में रक्खा है मिरा क़रार तुम्हारे बदन में रक्खा है
Siraj Faisal Khan
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