जाने किस बात की वो लड़की सजा देती है मेरे सारे लिखे अश'आर मिटा देती है मेरे तहरीर किए ख़त मिले भी तो कैसे मेरे भेजे वो कबूतर तो उड़ा देती है
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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जिन की आँखों में चुभ रहा हूँ आज कल मुझे देखने को तरसेंगे
Shivang Tiwari
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देखिए दूध का धुला नहीं हूँ हाँ मगर उतना भी बुरा नहीं हूँ
Shivang Tiwari
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मिरी अना की आबरू उछाल कर चला गया ये साल फिर से वहशतों में डाल कर चला गया
Shivang Tiwari
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ज़िंदगी लौट कर आ गई है इक जगह तू नज़र आ गई है रात भर याद करना था तुम को रात भी ता-सहर आ गई है
Shivang Tiwari
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रात के बा'द फिर रात आ जाती है मेरा सूरज ज़मीं रोज़ खा जाती है मैं छुपा ही नहीं पाता ज़ख़्मों को अब मेरे होंठों पे अब टीस आ जाती है
Shivang Tiwari
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