मिरी अना की आबरू उछाल कर चला गया ये साल फिर से वहशतों में डाल कर चला गया
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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया
Ismail Raaz
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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मैं अपने दोनों तरफ़ एक सा हूँ तेरे लिए किसी से शर्त लगा फिर मुझे उछाल के देख
Abrar Kashif
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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
Farhat Abbas Shah
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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ज़िंदगी लौट कर आ गई है इक जगह तू नज़र आ गई है रात भर याद करना था तुम को रात भी ता-सहर आ गई है
Shivang Tiwari
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जिन की आँखों में चुभ रहा हूँ आज कल मुझे देखने को तरसेंगे
Shivang Tiwari
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उलझे ख़याल दे कर ये साल चल दिया है दिल को मलाल दे कर ये साल चल दिया है कब कैसे किस तरह क्यूँ कितना कहाँ गँवाया कितने सवाल दे कर ये साल चल दिया है
Shivang Tiwari
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रात के बा'द फिर रात आ जाती है मेरा सूरज ज़मीं रोज़ खा जाती है मैं छुपा ही नहीं पाता ज़ख़्मों को अब मेरे होंठों पे अब टीस आ जाती है
Shivang Tiwari
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लहू से लिक्खी किताब होगी कहाँ सुना था ये ज़िन्दगी भी अ़ज़ाब होगी कहाँ सुना था ख़राब होगी यहाँ पे हालत सुना था मैं ने मग़र ये इतनी ख़राब होगी कहाँ सुना था
Shivang Tiwari
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