sherKuch Alfaaz

मिरी अना की आबरू उछाल कर चला गया ये साल फिर से वहशतों में डाल कर चला गया

More from Shivang Tiwari

ज़िंदगी लौट कर आ गई है इक जगह तू नज़र आ गई है रात भर याद करना था तुम को रात भी ता-सहर आ गई है

Shivang Tiwari

2 likes

जिन की आँखों में चुभ रहा हूँ आज कल मुझे देखने को तरसेंगे

Shivang Tiwari

0 likes

उलझे ख़याल दे कर ये साल चल दिया है दिल को मलाल दे कर ये साल चल दिया है कब कैसे किस तरह क्यूँ कितना कहाँ गँवाया कितने सवाल दे कर ये साल चल दिया है

Shivang Tiwari

2 likes

रात के बा'द फिर रात आ जाती है मेरा सूरज ज़मीं रोज़ खा जाती है मैं छुपा ही नहीं पाता ज़ख़्मों को अब मेरे होंठों पे अब टीस आ जाती है

Shivang Tiwari

2 likes

लहू से लिक्खी किताब होगी कहाँ सुना था ये ज़िन्दगी भी अ़ज़ाब होगी कहाँ सुना था ख़राब होगी यहाँ पे हालत सुना था मैं ने मग़र ये इतनी ख़राब होगी कहाँ सुना था

Shivang Tiwari

2 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Shivang Tiwari.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Shivang Tiwari's sher.