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झूठों ने बाज़ार लगाया सो इस में सच की तो फिर क़ीमत सस्ती होनी है

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वो मैं था जो उस की हर हाँ में शामिल नइँ था बस इस कारण ही तो मैं उस के क़ाबिल नइँ था उस दिल के दफ़्तर में मिल तो जाता काम मुझे हाँ पास मेरे रिश्वत में देने को दिल नइँ था

Jitendra "jeet"

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मेरी आँखों में आँसू हैं लबों पर है हँसी तेरे ग़मों से गर पड़े पाला तो मुझ को याद कर लेना न बाज़ी जीत पाए हम अगर दूजी मोहब्बत में तेरे हिस्से में आऊँ मैं यही फ़रियाद कर लेना

Jitendra "jeet"

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ये अमीरी इश्क़ पर भारी हुई जब से सो लगा है जिस्म का बाज़ार कमरे में

Jitendra "jeet"

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मैं तो अब शाम का ढलते सूरज सा हूँ तुम मेरी ज़िन्दगी का उजाला बनो मैं इबादत करूँँ हर घड़ी हर पहर तुम मेरी बंदगी तुम शिवाला बनो

Jitendra "jeet"

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राह में तेरी मैं कोई बाधा नहीं पर तेरा दिल दुखे ये इरादा नहीं मेरे हिस्से नहीं आएँगी रुक्मिणी मेरे हिस्से में जब कोई राधा नहीं

Jitendra "jeet"

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