jihaalat sirf usi surat mein door ho sakti hai jab daanish-gaahon ke sab darwaaze awaam par khol diye jaayenge.
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आओ गले मिल कर ये देखें अब हम में कितनी दूरी है
Shariq Kaifi
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उसी मक़ाम पे कल मुझ को देख कर तन्हा बहुत उदास हुए फूल बेचने वाले
Jamal Ehsani
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ज़िंदगी भर यूँँ मेरे दिल को दुखाया था बहुत क़ब्र पर आया है वो मुझ से मुआ'फ़ी के लिए
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ज़िंदगी भर मैं बोलूँगा तुझ को इश्क़ का यूँँ दग़ाबाज़ है तू
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वो शहर मेरा क्यूँ छोड़ दिया अब किस को देख के शे'र कहूँ
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ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
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वो दर्द भला क्या समझेंगे जो दर्द हमेशा देते हैं
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