जिन गलियों में आना जाना मुश्किल है उन गलियों में धूम मचाया करते थे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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किसी भी मुश्किल में सब सेे पहले जो साथ होगा वो बाप होगा तुम्हारे पीछे जो सब सेे मज़बूत हाथ होगा वो बाप होगा तुम्हें जिया कर तुम्हें बड़ा कर तुम्हें पढ़ा कर तुम्हें सीखा कर तुम्हारी सक्सेस में सब सेे ऊपर जो माथ होगा वो बाप होगा
Prakhar Sahay Srivastava
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नहीं दो चार बोलेंगे हज़ारों बार बोलेंगे हमारे इश्क़ के क़िस्से तुम्हारे द्वार बोलेंगे
Prakhar Sahay Srivastava
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बे-वफ़ा से ही वफ़ा की आपने एक बस इतनी ख़ता की आपने
Prakhar Sahay Srivastava
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आप तो उठ कर वहाँ से चल दिए ये बड़ी अच्छी सज़ा दी आपने
Prakhar Sahay Srivastava
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