जिसे इज़्ज़त नहीं दिल की उसे यक़सर ज़ुदा कर दो किसी को फूल देना है तो फिर उस को दिखा कर दो परिंदे मर रहे हैं क़ैद में तुम को ख़बर है क्या ज़रा उन पर तरस खाओ मेरी मानो रिहा कर दो
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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है जन्नत में सारी ही नेमत ख़ुदा की मुझे भी बताओ ये जन्नत कहाँ है
"Nadeem khan' Kaavish"
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मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
"Nadeem khan' Kaavish"
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सजी थी उदासी की महफ़िल जहाँ वहाँ पर हमें ही बुलाया गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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तेरे ख़ातिर जहाँ डूबा वो दरिया भी किनारा था
"Nadeem khan' Kaavish"
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यही इक बात कहनी है मुहब्बत से, मुहब्बत है
"Nadeem khan' Kaavish"
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