जिस की ख़ातिर तड़पता हूँ इतना मर न जाऊँ अगर वो मिल जाए
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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उसे हर वक़्त करता हूँ महसूस वो जिसे आज तक छुआ ही नहीं
Prit
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नौकरी पा के लौटा मैं जब घर देखा तो उस की शादी हो चुकी थी
Prit
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पहले मूरत में प्राण डाले फिर आदमी आप हो गया पत्थर
Prit
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'प्रीत' जिस तिस बहाने कर भी ले एक तितली से बात फूलों की
Prit
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कृष्ण से इश्क़ कर लिया मैं ने कोई लड़की नहीं लुभाती अब
Prit
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