जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं अब तो बस आसमान बाक़ी है
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तोड़ कर तुझ को भला मेरा भी क्या बन जाता उल्टा मैं ख़ुद की मुहब्बत प सज़ा बन जाता जितनी कोशिश है तिरी एक तवज्जोह के लिए उस सेे कम में तो मैं दुनिया का ख़ुदा बन जाता
Ashutosh Vdyarthi
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अब तो उतनी भी मुयस्सर नहीं मय-ख़ाने में जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में
Divakar Rahi
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर
Zafar Iqbal
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बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले
Kaifi Azmi
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दोस्तों का क्या है वो तो यूँँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त रोज़ इक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ
Rajesh Reddy
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दरवाज़े के अंदर इक दरवाज़ा और छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और
Rajesh Reddy
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आसमाँ ने बंद कर लीं खिड़कियाँ अब ज़मीं में उस की दिलचस्पी नहीं
Rajesh Reddy
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वो आफ़ताब लाने का देकर हमें फ़रेब हम सेे हमारी रात के जुगनू भी ले गया
Rajesh Reddy
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जैसे ग़लत पते पे चला आए कोई शख़्स सुख ऐसे मेरे दर पे रुका और गुज़र गया
Rajesh Reddy
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