तोड़ कर तुझ को भला मेरा भी क्या बन जाता उल्टा मैं ख़ुद की मुहब्बत प सज़ा बन जाता जितनी कोशिश है तिरी एक तवज्जोह के लिए उस सेे कम में तो मैं दुनिया का ख़ुदा बन जाता
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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मैं वो नाकाम मुसव्विर हूँ जो ख़ुद के हाथों एक उदासी के सिवा कुछ न बना पाया है
Ashutosh Vdyarthi
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इस सेे कमज़ोरी ही दुनिया को पता होती है बैन करने से कहीं दुख की दवा होती है
Ashutosh Vdyarthi
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जिन्हें सब लोग गूँगा बोलते हैं मेरे आगे वो ऊँचा बोलते हैं ख़मोशी बोलने वालों की सफ़ में हमीं सब सेे ज़ियादा बोलते हैं
Ashutosh Vdyarthi
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मेरे मिज़ाज की उस को ख़बर नहीं रही है ये बात मेरे गले से उतर नहीं रही है ये रोने-धोने का नाटक तवील मत कर अब बिछड़ भी जाए तू मुझ सेे तो मर नहीं रही है
Ashutosh Vdyarthi
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कुल जोड़ घटाकर जो ये संसार का दुख है उतना तो मिरे इक दिल-ए-बेज़ार का दुख है शाइ'र हैं तो दुनिया से अलग थोड़ी हैं लोगों सबकी ही तरह हमपे भी घर बार का दुख है
Ashutosh Vdyarthi
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