sherKuch Alfaaz

जितनी चहल पहल दोपहरी उतनी ख़ाली ख़ाली शाम सुरसा जैसी तन्हाई ने लो फिर मेरी खा ली शाम

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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था

Tehzeeb Hafi

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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते

Rahat Indori

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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

Allama Iqbal

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

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मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर ख़ाली है बाबूजी मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी मिट्टी बेच रहा हूँ जिस में कोई जाल फ़रेब नहीं सोना चाँदी दूध मिठाई सब जा'ली है बाबूजी

Gyan Prakash Akul

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