जितनी दुनिया बनाई है उस ने हम तो बिछड़े हर एक दुनिया में
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अब दिखाते हैं आइना मुझ को बेतहाशा रुलाने वाले लोग
Aves Sayyad
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कितना सुकून है तेरी बाहों में जान-ए-जाँ जी चाहता है मैं तुझे बाहों में बाँध लूँ
Aves Sayyad
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ईद पर सब फूल ले कर आ रहे हैं हो गए हैं ज़िंदगी के ख़त्म रमज़ान
Aves Sayyad
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तेरे घर की खुली इन खिड़कियों में जा फँसे हैं घनी ज़ुल्फ़ों में तेरी हम उलझ कर रह गए हैं न कोई है हमारा, है न हम में हौसला फिर दुआ पर जाने किस की, उम्र अपनी जी रहे हैं
Aves Sayyad
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इस्तिफ़ादा, दाम, शोहरत, है न ख़्वाहिश शा'इरी से याद मेरा नाम तुम को रह गया, ये भी बहुत है
Aves Sayyad
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