तेरे घर की खुली इन खिड़कियों में जा फँसे हैं घनी ज़ुल्फ़ों में तेरी हम उलझ कर रह गए हैं न कोई है हमारा, है न हम में हौसला फिर दुआ पर जाने किस की, उम्र अपनी जी रहे हैं
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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अब दिखाते हैं आइना मुझ को बेतहाशा रुलाने वाले लोग
Aves Sayyad
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कितना सुकून है तेरी बाहों में जान-ए-जाँ जी चाहता है मैं तुझे बाहों में बाँध लूँ
Aves Sayyad
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जितनी दुनिया बनाई है उस ने हम तो बिछड़े हर एक दुनिया में
Aves Sayyad
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मैं सोच रहा बदले वो कुछ प्यार का मतलब यूँँ तो मुझे मालूम है इनकार का मतलब
Aves Sayyad
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मुझ को गणित पढ़ते ही आया ध्यान है ज़िंदगी भी तो ये साइन कर्व
Aves Sayyad
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