कागज़ों की कश्ती पर दिल के ज़ख़्म ढोते हैं हाथ लगती चीज़ों को हाथ लगते खोते हैं एक दिन अँधेरे ने आके मुझ सेे बोला ये जो उदास रहते नइँ वो उदास होते हैं
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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जो जो जितना पास था मेरे वो वो उतना दूर हुआ उस सेे कहा इक छोटा क़िस्सा अगले ही दिन मशहूर हुआ किसी सहारे की चाहत में जब जब टूटे रातों को ख़ुद के कंधे पर सिर रखना फिर रोना मंज़ूर हुआ
Anmol Mishra
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फटे मुक़द्दर पे रख के खद्दर हुई सिकंदर उदास नस्लें ज़मीन फाड़ी निचोड़े बादल बनाए सागर उदास नस्लें सुलगते ख़्वाबों की राख ले कर गढ़े थे पुतले जो टेढ़े मेढ़े हँसी के मंतर से जान फूँके उन्हीं के अंदर उदास नस्लें
Anmol Mishra
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ख़ामोशियाँ ग़ुलाम बनाती हैं शोर को शब इश्क़ के उसूल सिखाती चकोर को दिन भर तो मेरे यार मेरे यार थे बहुत पर शाम को गया जो वो लौटा न भोर को
Anmol Mishra
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क़ीमती स्याही भरी जिस जिस क़लम में आँसुओं की वक़्त पे वो भूल बैठे ये ग़लत ये ठीक सा है बोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरी एक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है
Anmol Mishra
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तुम्हारा दिल है बड़ा सा दरबा जहाँँ कबूतर फड़क रहे हैं कहाँँ है खोई हमारी चिट्ठी कहाँँ कबूतर भटक रहा है
Anmol Mishra
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