जो जो जितना पास था मेरे वो वो उतना दूर हुआ उस सेे कहा इक छोटा क़िस्सा अगले ही दिन मशहूर हुआ किसी सहारे की चाहत में जब जब टूटे रातों को ख़ुद के कंधे पर सिर रखना फिर रोना मंज़ूर हुआ
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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ख़ामोशियाँ ग़ुलाम बनाती हैं शोर को शब इश्क़ के उसूल सिखाती चकोर को दिन भर तो मेरे यार मेरे यार थे बहुत पर शाम को गया जो वो लौटा न भोर को
Anmol Mishra
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फटे मुक़द्दर पे रख के खद्दर हुई सिकंदर उदास नस्लें ज़मीन फाड़ी निचोड़े बादल बनाए सागर उदास नस्लें सुलगते ख़्वाबों की राख ले कर गढ़े थे पुतले जो टेढ़े मेढ़े हँसी के मंतर से जान फूँके उन्हीं के अंदर उदास नस्लें
Anmol Mishra
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तमाम रातें सुकून सारा चुरा के जानाँ कहाँँ को चल दी सुनो शब-ए-वस्ल है हमारी जगा के जानाँ कहाँँ को चल दी हमारे पैरों पे पैर रख के खड़ी हुई थी गले लगाने तुम्हारे पैरों लगी महावर लगा के जानाँ कहाँँ को चल दी
Anmol Mishra
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क़ीमती स्याही भरी जिस जिस क़लम में आँसुओं की वक़्त पे वो भूल बैठे ये ग़लत ये ठीक सा है बोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरी एक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है
Anmol Mishra
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धुएँ की चाह में पागल हरी पत्ती जलाते हो समझ पाए न इल्मों को तो तुम पुस्ती जलाते हो बहुत नादान हो तुम भी तुम्हारी हरकतें क्या कम उजाले को मिटाने के लिए बत्ती जलाते हो
Anmol Mishra
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