फटे मुक़द्दर पे रख के खद्दर हुई सिकंदर उदास नस्लें ज़मीन फाड़ी निचोड़े बादल बनाए सागर उदास नस्लें सुलगते ख़्वाबों की राख ले कर गढ़े थे पुतले जो टेढ़े मेढ़े हँसी के मंतर से जान फूँके उन्हीं के अंदर उदास नस्लें
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी
Yasir Khan
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मिलना हमारा कम हुआ फिर बात कम हुई क़िस्तों में मुझ ग़रीब की ख़ैरात कम हुई
Bhawana Srivastava
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रक़ीबों ने कहा मुझ सेे दिखाओ रूम तुम अपना किताबें ग़म उदासी और इक फ़ोटो मिली उन को
Rohit Gustakh
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उदासी इक समुंदर है कि जिस की तह नहीं है मैं नीचे और नीचे और नीचे जा रहा हूँ
Charagh Sharma
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ख़ामोशियाँ ग़ुलाम बनाती हैं शोर को शब इश्क़ के उसूल सिखाती चकोर को दिन भर तो मेरे यार मेरे यार थे बहुत पर शाम को गया जो वो लौटा न भोर को
Anmol Mishra
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क़ीमती स्याही भरी जिस जिस क़लम में आँसुओं की वक़्त पे वो भूल बैठे ये ग़लत ये ठीक सा है बोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरी एक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है
Anmol Mishra
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जो जो जितना पास था मेरे वो वो उतना दूर हुआ उस सेे कहा इक छोटा क़िस्सा अगले ही दिन मशहूर हुआ किसी सहारे की चाहत में जब जब टूटे रातों को ख़ुद के कंधे पर सिर रखना फिर रोना मंज़ूर हुआ
Anmol Mishra
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ये हुनर मेरे भी अंदर आ गया है दोस्तों दिल पे लगती बात को बस मुस्कुरा कर टाल दूँ
Anmol Mishra
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कागज़ों की कश्ती पर दिल के ज़ख़्म ढोते हैं हाथ लगती चीज़ों को हाथ लगते खोते हैं एक दिन अँधेरे ने आके मुझ सेे बोला ये जो उदास रहते नइँ वो उदास होते हैं
Anmol Mishra
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