तुम्हारा दिल है बड़ा सा दरबा जहाँँ कबूतर फड़क रहे हैं कहाँँ है खोई हमारी चिट्ठी कहाँँ कबूतर भटक रहा है
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
Jaun Elia
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फटे मुक़द्दर पे रख के खद्दर हुई सिकंदर उदास नस्लें ज़मीन फाड़ी निचोड़े बादल बनाए सागर उदास नस्लें सुलगते ख़्वाबों की राख ले कर गढ़े थे पुतले जो टेढ़े मेढ़े हँसी के मंतर से जान फूँके उन्हीं के अंदर उदास नस्लें
Anmol Mishra
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जो जो जितना पास था मेरे वो वो उतना दूर हुआ उस सेे कहा इक छोटा क़िस्सा अगले ही दिन मशहूर हुआ किसी सहारे की चाहत में जब जब टूटे रातों को ख़ुद के कंधे पर सिर रखना फिर रोना मंज़ूर हुआ
Anmol Mishra
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तमाम रातें सुकून सारा चुरा के जानाँ कहाँँ को चल दी सुनो शब-ए-वस्ल है हमारी जगा के जानाँ कहाँँ को चल दी हमारे पैरों पे पैर रख के खड़ी हुई थी गले लगाने तुम्हारे पैरों लगी महावर लगा के जानाँ कहाँँ को चल दी
Anmol Mishra
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ये हुनर मेरे भी अंदर आ गया है दोस्तों दिल पे लगती बात को बस मुस्कुरा कर टाल दूँ
Anmol Mishra
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ख़ामोशियाँ ग़ुलाम बनाती हैं शोर को शब इश्क़ के उसूल सिखाती चकोर को दिन भर तो मेरे यार मेरे यार थे बहुत पर शाम को गया जो वो लौटा न भोर को
Anmol Mishra
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