काँटों की महफ़िल में, हम फूल कहाँ जाएँगे तेरी उस चाहत को, हम भूल कहाँ पाएँगे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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बातें नहीं करनी मुझे यार फिर भी उस शख़्स ने बातों में उलझा रखा है
Rudransh Trigunayat
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ग़म हमें औलाद का है ग़ैर से शिकवा नहीं अब तुम्हें हम क्या बताएं क्या परेशानी हुई
Rudransh Trigunayat
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दस्त सींचा हाथ से इक पेड़ पर फल है नहीं अब तुम्हें हम क्या बताएँ क्या परेशानी हुई
Rudransh Trigunayat
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नहीं जी लगता जाने क्या हुआ है धड़कता दिल है मुँह उतरा हुआ है बहन ने माँ को कल ये भी बताया किसी चक्कर में ये बहका हुआ है
Rudransh Trigunayat
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मैं रुठूगा कोई मुझे मनायेगा नहीं ये मेरा ग़म उस को कभी सतायेगा नहीं
Rudransh Trigunayat
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