काश वो दिन वो ज़माने लौट आएँ बिन तुम्हारे भी गुज़ारा था कभी
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
Abrar Kashif
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ये तुम सब मिल के जो कुछ कह रहे हो मैं कह सकता हूँ पर कहना नहीं है हमारा शे'र भी सुनने न आएँ हमारा दुख जिन्हें सहना नहीं है
Ali Zaryoun
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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कौन था वो जिस ने ये हाल किया है मेरा किस को इतनी आसानी से हासिल था मैं
Shariq Kaifi
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फिर तुम्हारे बराबर खड़ा शख़्स कुछ इस तरह से हँसा जैसे तुम ने बताया हो उस को है ये भी दीवाना मेरा
Shariq Kaifi
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कहाँ रोते उसे शादी के घर में सो इक सूनी सड़क पर आ गए हम
Shariq Kaifi
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वहाँ ईद क्या वहाँ दीद क्या जहाँ चाँद रात न आई हो
Shariq Kaifi
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कौन कह सकता है उस को देख कर ये वही है जो हमारा था कभी
Shariq Kaifi
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