कब तलक याद करूँँ कितने बहाऊँ आँसू छोड़ भी दे मुझे अब छोड़ के जाने वाले
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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वो तो निगाहों ने मार डाला वगरना हम पे चली है किस की
Aqib khan
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तुम को जाना है चले जाओ मगर याद रहे हम तो वो हैं जो पलटकर भी न देखेंगे कभी
Aqib khan
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ये जो हर सम्त ही वीराना नज़र आता है सच कहूँ गर तो ये ग़लती है तेरी आँखों की
Aqib khan
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साहिर को तो सिर आँखों बिठाया नहीं जाता बर्बादियों का जश्न मनाया नहीं जाता कोशिश में लगे हैं जिसे हम भूलने में दोस्त वो शख़्स घड़ी भर को भुलाया नहीं जाता
Aqib khan
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मैं जाना चाहता हूँ बचपने में शुरू से सब शुरू करना है मुझ को
Aqib khan
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