साहिर को तो सिर आँखों बिठाया नहीं जाता बर्बादियों का जश्न मनाया नहीं जाता कोशिश में लगे हैं जिसे हम भूलने में दोस्त वो शख़्स घड़ी भर को भुलाया नहीं जाता
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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वो तो निगाहों ने मार डाला वगरना हम पे चली है किस की
Aqib khan
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तुम को जाना है चले जाओ मगर याद रहे हम तो वो हैं जो पलटकर भी न देखेंगे कभी
Aqib khan
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ये जो हर सम्त ही वीराना नज़र आता है सच कहूँ गर तो ये ग़लती है तेरी आँखों की
Aqib khan
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मिलेंगे कहाँ पे ये ग़म सीने वाले बता दे मुझे हर घड़ी जीने वाले
Aqib khan
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मुझ को मरवा के ही छोड़ेगी ये ताख़ीर मेरी उस की गर्दन पे जो रुक जाए है शमशीर मेरी
Aqib khan
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