मुझ को मरवा के ही छोड़ेगी ये ताख़ीर मेरी उस की गर्दन पे जो रुक जाए है शमशीर मेरी
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था
Tehzeeb Hafi
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वो तो निगाहों ने मार डाला वगरना हम पे चली है किस की
Aqib khan
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ये जो हर सम्त ही वीराना नज़र आता है सच कहूँ गर तो ये ग़लती है तेरी आँखों की
Aqib khan
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मुहब्बत की हिमायत करने वालों बचा लो मिल के इस को नफ़रतों से
Aqib khan
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कब तलक याद करूँँ कितने बहाऊँ आँसू छोड़ भी दे मुझे अब छोड़ के जाने वाले
Aqib khan
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अपने ही हाल पे रो देता हूँ अक्सर यारों रोना भी ऐसा कि सिसकी की भी आहट न लगे
Aqib khan
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