कभी चाहत पे शक करते हुए ये भी नहीं सोचा तुम्हारे साथ क्यूँ रहते अगर अच्छा नहीं लगता
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की मैं मिट्टी गूँधता था अब डबलरोटी बनाता हूँ
Munawwar Rana
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न जाने कैसी महक आ रही है बस्ती से वही जो दूध उबलने के बा'द आती है
Munawwar Rana
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उस की तरफ़ से फूल भी आएँगे एक रोज़ पत्थर उठा के चूम ले इस को पहल समझ
Munawwar Rana
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दुनिया भी जैसे ताश के पत्तों का खेल है जोकर के साथ रहती है रानी ही क्यूँ न हो
Munawwar Rana
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मैदान छोड़ देने से मैं बच तो जाऊँगा लेकिन जो ये ख़बर मेरी माँ तक पहुँच गई
Munawwar Rana
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