उस की तरफ़ से फूल भी आएँगे एक रोज़ पत्थर उठा के चूम ले इस को पहल समझ
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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फोन भी आया तो शिकवे के लिए फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ आता होगा उस का ठुकराया हुआ
Balmohan Pandey
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पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की
Tehzeeb Hafi
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तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता है कि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता है है बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते ही वो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है
Tehzeeb Hafi
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सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की मैं मिट्टी गूँधता था अब डबलरोटी बनाता हूँ
Munawwar Rana
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ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है
Munawwar Rana
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मुझे वो छोड़ जाना चाहता था मगर कोई बहाना चाहता था
Munawwar Rana
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वो ज़ालिम मेरी हर ख़्वाहिश ये कह कर टाल जाता है दिसंबर जनवरी में कोई नैनीताल जाता है?
Munawwar Rana
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इस अहद में हज़ार के नोटों की क़द्र है गाँधी भी ख़ुश नहीं थे चवन्नी पे बैठ कर
Munawwar Rana
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