कभी गर्म है कभी सर्द है फ़िज़ा हयात की कभी धूप में कभी छाँव में टहल कर आ गए
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ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बा'द भी वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रख कर देखिए
nakul kumar
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उस वक़्त भी अक्सर तुझे हम ढूँढ़ने निकले जिस धूप में मज़दूर भी छत पर नहीं जाते
Munawwar Rana
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बचपना ऐ लड़को तुम सेे कभी छूटता ही नहीं जवान होना तो बस लड़कियों को आता है
Kumar Vishwas
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मुहब्बत में समझदारी से अक्सर काम लेते हैं कहीं महबूब वो कहते कहीं वो नाम लेते हैं मचलता है कभी जो दिल करें बातें निगाहों से इजाज़त धड़कने देतीं वो दिल को थाम लेते हैं
Rohit Gustakh
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मुनव्वर माँ के आगे यूँँ कभी खुल कर नहीं रोना जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती
Munawwar Rana
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न मेरा है न किसी और के बाप का सूरज है इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरज गुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हा के एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज
Amaan mirza
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ये सच है मुझ को दिखते नहीं तेरे ऐब-ओ-ख़म दिखने लगी हैं ख़ूबियाँ तू है मुझे पसंद
Amaan mirza
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नज़दीक में रखा मुझे तन्हा नहीं किया कइयों ने मुझ को चाहा पर अपना नहीं किया तुम ने भी भेज दी मेरी जानिब मशकक़तें सुलझे हुए को उलझा के अच्छा नहीं किया
Amaan mirza
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ये आज कल नए लौंडे हमारे शे'रों में कमी टटोलते हैं उस पे काम करते नहीं
Amaan mirza
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कुछ ऐसे करता है वो मुझ सेे बात आहिस्ता आहिस्ता के मालो ज़र की बढ़ती हो ज़कात आहिस्ता आहिस्ता
Amaan mirza
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