मुहब्बत में समझदारी से अक्सर काम लेते हैं कहीं महबूब वो कहते कहीं वो नाम लेते हैं मचलता है कभी जो दिल करें बातें निगाहों से इजाज़त धड़कने देतीं वो दिल को थाम लेते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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इशारे में उस ने कहा मुस्कुरा कर इशारे से तुम को इशारा करेंगे
Rohit Gustakh
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ग़म-ए-दुनिया से आगे कुछ नहीं है जहाँ तुम आशनाई कर रही हो
Rohit Gustakh
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किसे मालूम था क्या कर चुका था मैं मुझे जब होश आया मर चुका था मैं
Rohit Gustakh
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अपने इस दिल को पत्थर कर लेंगे हम ख़ुद को तुझ से कमतर कर लेंगे दुनिया बहरी हो जाएगी इक दिन इतनी ख़ामोशी अंदर कर लेंगे
Rohit Gustakh
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कहीं ये सब्र खा जाए न हम को किसी के दुख समेटे फिर रहे हैं
Rohit Gustakh
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