कहीं ये सब्र खा जाए न हम को किसी के दुख समेटे फिर रहे हैं
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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ये भी मशहूर था कूचे में उस के जिसे तुम लोग पागल कह रहे हो
Rohit Gustakh
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ज़माने में किसी से दिल लगाकर किसी का दिल दुखाया था किसी ने
Rohit Gustakh
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किसे मालूम था क्या कर चुका था मैं मुझे जब होश आया मर चुका था मैं
Rohit Gustakh
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चूम कर ज़ख़्म फिर से हरा कर दिया क्या लगा था तुम्हें मोजिज़ा कर दिया आप के इश्क़ का क़र्ज़ था मुझ पे जो काटकर हिज्र की शब अदा कर दिया
Rohit Gustakh
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तुम रहबर हो फरिश्तों के गुस्ताख़ क्यूँ पागल आदमी में उलझे हो
Rohit Gustakh
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