तुम रहबर हो फरिश्तों के गुस्ताख़ क्यूँ पागल आदमी में उलझे हो
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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ग़म-ए-दुनिया से आगे कुछ नहीं है जहाँ तुम आशनाई कर रही हो
Rohit Gustakh
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अपने इस दिल को पत्थर कर लेंगे हम ख़ुद को तुझ से कमतर कर लेंगे दुनिया बहरी हो जाएगी इक दिन इतनी ख़ामोशी अंदर कर लेंगे
Rohit Gustakh
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मुहब्बत में बिछड़ने की ग़लत-फ़हमी हुई होगी वगरना कौन करता है बग़ावत राजधानी में
Rohit Gustakh
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किसे मालूम था क्या कर चुका था मैं मुझे जब होश आया मर चुका था मैं
Rohit Gustakh
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किसी ने कह दिया जंगल बनेगा परिंदे घर बनाते फिर रहे हैं
Rohit Gustakh
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